जानता नहीं उसे, न मिला हूँ एक बार
उम्र कट गयी है करके उसका इंतज़ार
है नहीं कहीं वो शायद इस जहान में
फिर भी मज़ा आ रहा है करके उसका इंतज़ार
उम्र कट गयी है करके उसका इंतज़ार
है नहीं कहीं वो शायद इस जहान में
फिर भी मज़ा आ रहा है करके उसका इंतज़ार
ख़ुश हूँ के दूसरा कोई है रास्ता नहीं
ग़म भी तो हुआ है करके उसका इंतज़ारघर में ही क़ैद रहता हूँ अब इस तलाश में
वो आए न आए, न जाए उसका इंतज़ार
इस मुल्क में बाग़ों की कमी वैसे तो नहीं
हर बाग़ कर रहा है पत्तियों का इंतज़ार
वो फूल जो मैं ढूँढता हूँ इतने वक़्त से
वो हो गया स्याह करके मेरा इंतज़ार
गुलिस्ताँ के उस एक फूल की बस चाह थी मुझे
उस फूल ने पर टूटने से मना कर दिया
नाराज़गी की वैसे भी गुंजाइश ही न थी
हम हँसते हँसते कर ही गए उसका इंतज़ार